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शुक्रवार, 22 जनवरी 2021

यह समय है झूठ का

यह समय है झूठ का, अब साँच को मत  देख!

देख मत पंचायतों को, जाँच को मत देख!!


नेपथ्य से नाटक चलाता धूर्त  निर्देशक;

तू थिरकती पुतलियों के नाच को मत देख!


हाथ उसके की सफाई को पकड़ना है अगर;

तो लहरती उँगलियों के नाच को मत देख!


आग का दरिया तिरेगी, भूमि की बेटी;

तू नज़र उस पार रख, इस आँच को मत देख!


साँस जब तक शेष है, नाचना होगा यहाँ;

पाँव में जो चुभ रहा, उस काँच को मत देख!

19/1/2020

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