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बुधवार, 2 मई 2012

लोक समर्थन के चेहरे पर काजल पोत दिया

लोक समर्थन के चेहरे पर काजल पोत दिया
सहज समर्पण के चेहरे पर काजल पोत दिया

एक बार उसके चेहरे के दाग दिखाए तो
उसने दर्पण के चेहरे पर काजल पोत दिया

राजमुद्रिका शकुंतला से भारी होती है
शुभ्र तपोवन के चेहरे पर काजल पोत दिया

विवश कुन्तियाँ गंगा में कुलदीप सिराती हैं
पूजन अर्चन के चेहरे पर काजल पोत दिया

रिश्ते नातों की मर्यादा के हत्यारों ने
हर संबोधन के चेहरे पर काजल पोत दिया

कुर्सीजीवी संतानों से राजघाट बोला
तुमने तर्पण के चेहरे पर काजल पोत दिया   [135]

पूर्णकुंभ - फरवरी मार्च 2001 - आवरण पृष्ठ 


2 टिप्‍पणियां:

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

'रिश्ते नातों की मर्यादा के हत्यारों ने
हर संबोधन के चेहरे पर काजल पोत दिया'
- सचमुच,अब तो रिश्ते-नातोंवाले संबोधन एक बहाना भर रह गये हैं!

Poem hindi poetry ने कहा…

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