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गुरुवार, 19 मई 2011

अंबर ने फिर थोपा है तम, आओ दिए जलाएँ

अंबर ने फिर थोपा है तम, आओ दिए जलाएँ
हो प्रकाश का पर्व मनोरम, आओ दिए जलाएँ

आँखों में तेज़ाब ढालकर,  तकुए बहुत पिरोए
अंधी कुटिया में तनिक सनम, आओ दिए जलाएँ

बाँहों के नागों को यारो, वश में करना होगा
डुग्गी वाला आया डमडम, आओ दिए जलाएँ

चुप बैठे हैं लोग यहाँ पर, तेल कान में डाले
खूब पटाखों का हो ऊधम,आओ दिए जलाएँ

साँकल, ताले, लाकर, थैली, लक्ष्मी क़ैद जहाँ भी
मचे मुक्ति का तांडव बम-बम, आओ दिए जलाएँ  [115]

22 अक्टूबर 1981 .

सोमवार, 16 मई 2011

लपटों में जल रहा, ये अपना देश है

लपटों में जल रहा, ये अपना देश है 
नागों ने डँस लिया, ये अपना देश है 

अंबर पे उड़ रहे, धरती के ध्वज कई
 धरती पे परकटा, ये अपना देश है

रोको भले कहीं, ज़ंजीर खींचकर 
रेलों के रेले सा, ये अपना देश  है

वे माँगते हैं प्रांत, वे धर्म बदलते 
साज़िश में घिर गया, ये अपना देश है

झंडों की चिंदियाँ हैं उड़ रही जनाब 
अब सोचिए ज़रा, ये अपना देश है

जो खून कर रहे भारत के स्वप्न का
दो मौत की सज़ा, ये.अपना देश है   [114]

      17 अक्टूबर, 1981

रविवार, 15 मई 2011

जनता की अदालत लगी, इन्साफ कीजिए

जनता की अदालत लगी, इन्साफ कीजिए
संसद कटहरे में खडी, इन्साफ कीजिए

सुविधाएँ भोगते हैं वे शासन के नाम पर
भूखे से बुधिया मर गई, इन्साफ कीजिए

उनके भतीजे ले रहे हर एक लाइसेंस
इनको न रोजी मिल सकी, इन्साफ कीजिए

कुर्सी की खींचतान में गांधी की आत्मा
लोहूलुहान हो रही, इन्साफ कीजिए

सारे सफेदपोश डकैतों के वास्ते
है कौन सी सज़ा सही, इन्साफ कीजिए   [113]

                                      17 अक्टूबर , 1981  

गुरुवार, 14 अप्रैल 2011

कीमत है साठ पैसे, अखबार लीजिए

कीमत है साठ पैसे,* अखबार लीजिए
मंडी लुटी है कैसे ,    अखबार लीजिए

गिरती पतंग लूटते जिस तरह से लोग
लुटती है लाज ऐसे,   अखबार लीजिए

अमरीका हो या पाक हो या रूस हो या चीन
भूखे हैं गीध जैसे,      अखबार लीजिए

जूतों से मुक्कों से भिड़ते हैं शराबी
एम पी लड़े हैं वैसे,     अखबार लीजिए

चोरों के हाथ काट दो, लोगों की माँग है
जैसे के साठ तैसे!      अखबार लीजिए   [112]

                                  *16 अक्टूबर,1981 .  

बुधवार, 13 अप्रैल 2011

झीलों में ज़हर घुला है, ताज़ा ख़बर है

झीलों में ज़हर घुला है, ताज़ा ख़बर है
सकते में लाल किला है, ताज़ा ख़बर है

झूठे प्रमाणपत्र ले  नीले सियार ने
हर एक जंतु छाला है, ताज़ा ख़बर है

ज़ाहिर हुआ है आज यों उनका आचरण
संसद कि साँप नेवला है, ताज़ा ख़बर है

नेता के सह-वास से कुर्सी को, दोस्तो!
उपदंश दान मिला है, ताज़ा ख़बर है

कैंसर से सड़ रहे अंगों को काट दो
वैद्यों का फैसला है,  ताज़ा ख़बर है        [111]

16 अक्टूबर, 1981