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रविवार, 3 मई 2009

टोपी वाले नटवर नागर ! मेरे तुम्हें प्रणाम

टोपी वाले नटवर नागर ! मेरे तुम्हें प्रणाम
वर्दी वाले तेरे चाकर, मेरे तुम्हें प्रणाम

उनके पास न कानी कौड़ी, फूटा नहीं छदाम
तुम सारे रत्नों के सागर, मेरे तुम्हें प्रणाम

उनकी तलवारों का पानी, फीका नहीं हुजूर
तुम बारूदी अकबर-बाबर, मेरे तुम्हें प्रणाम

दीवारों पर लिखे उन्होंने, युद्ध-क्रांति-संग्राम
पढ़े नहीं तुमने दो आखर, मेरे तुम्हें प्रणाम

वह देखो उस पार जल उठी, एकाएक मशाल
डूब रही है भरकर गागर, मेरे तुम्हें प्रणाम (79)

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