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गुरुवार, 18 दिसंबर 2008

अब तो उलटना नकाब होगा

अब तो उलटना नकाब होगा

 

अब तो उलटना नकाब होगा
जुर्मों का उनके हिसाब होगा

हमारा खूने-जिगर कब तलक
उन्हीं का जामे-शराब होगा

जिन्होनें छीनी हमारी रोटी
अब उनका खा़ना ख़राब होगा

कुदाल-खुरपी औ' फावडा-हल
अब नूर होगा शबाब होगा

चुएगी गंगा हमारे सिर से
सारा पसीना गुलाब होगा            ६२

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