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शनिवार, 20 दिसंबर 2008

जितना चरित्रहीन जो उतना महान है !

जितना चरित्रहीन जो उतना महान है !
 

 

 

कुछ लोग जेब में उसे धर घूम रहे हैं
सबसे विशाल विश्व में जो संविधान है

 



हर बार हर चुनाव में बस सिद्ध यह हुआ
जितना चरित्रहीन जो उतना महान है

 


ये वोट के समीकरण समझा न आदमी
कुर्सी की ओर हर शहीद का रुझान है

 


वे सूत्रधार संप्रदाय-युद्ध के बने
बस एकता - अखंडता जिनका बयान है

 


गूँगा तमाशबीन बना क्यों खड़ा है तू ?
तेरी कलम , कलम नहीं , युग की ज़बान है     [६६]

2 टिप्‍पणियां:

rachna ने कहा…

very true
aap likhtey rahiyae acchha likha haen

dhirusingh ने कहा…

wah wah 100%sahi
हर बार हर चुनाव में बस सिद्ध यह हुआ
जितना चरित्रहीन जो उतना महान है