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शुक्रवार, 17 अप्रैल 2009

कुर्ते की जेबें खाली हैं


कुर्ते की जेबें खाली हैं






कुर्ते की जेबें खाली हैं , औ' फटा हुआ है पाजामा
इनको न भिखारी समझो तुम ,ये करने निकले हंगामा

धक्के-मुक्के, गाली-गुस्सा ,खा-पीकर इतने बड़े हुए
फुसला न सकोगे इनको तुम, दिखला करके चंदामामा

दिल्ली वाले बाजीगर जी! अब जाग उठा है शेषनाग
भागो, छोड़ो यह बीन-शीन, यह टोपी-बालों का ड्रामा [ ६८ ]

1 टिप्पणी:

Shyamal Suman ने कहा…

कुर्ते की जेबें खाली हो या जेबों में खाली कुर्ते हों।
जीत रहा है कृष्ण यहाँ और हारा सदा सुदामा।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com