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गुरुवार, 4 जुलाई 2013

सारे सपने आधे, जनता परेशान है

सारे सपने आधे, जनता परेशान है
सिर पर कुर्सी लादे, जनता परेशान है

लिए हाथ में लट्ठ अराजक टहल रहे हैं
किसकी मुश्कें बाँधे, जनता परेशान है

जल्लादों की फौज माँगने वोट चली है
इनके भाँप इरादे, जनता परेशान है

अपने हत्यारे चुनने की आज़ादी है
झुके हुए सिर-काँधे, जनता परेशान है

भरे जेब में पत्थर कब से घूम रही है
किस किस के सिर साधे, जनता परेशान है      [136] 

1 टिप्पणी:

Manu Tyagi ने कहा…

प्रिय ब्लागर
आपको जानकर अति हर्ष होगा कि एक नये ब्लाग संकलक / रीडर का शुभारंभ किया गया है और उसमें आपका ब्लाग भी शामिल किया गया है । कृपया एक बार जांच लें कि आपका ब्लाग सही श्रेणी में है अथवा नही और यदि आपके एक से ज्यादा ब्लाग हैं तो अन्य ब्लाग्स के बारे में वेबसाइट पर जाकर सूचना दे सकते हैं

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