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गुरुवार, 2 जुलाई 2015

पकने लगी फसल, रीझता किसान


पकने लगी फसल, रीझता किसान
जल्दी पकी फसल, रीझता किसान

ली सेठ ने खरीद, पैसे उछाल कर
खेतों खड़ी फसल, रीझता किसान

कर्जा उतर गया, सिर पर लदा हुआ
अच्छी हुई फसल, रीझता किसान

दो रोटियाँ मिलें, दो वक़्त के लिए
कुछ तो बची फसल, रीझता किसान

जो पौध गल गई थी, खाद बन गई
आई नई फसल, रीझता किसान
(137)                               [औरंगाबाद : 30/6/2015: 2307]