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शनिवार, 24 सितंबर 2011

दर्द से हमने जबाड़े कस लिए

दर्द से हमने जबाड़े कस लिए
सिर्फ अभिनय जानकर तुम हँस दिए

हैं पडी बँधुआ हमारी पीढ़ियाँ
रौंदिए या चुटकियों में मसलिए

पालकी को सात पुश्तें ढ़ो रहीं
पद-प्रहारों में तुम्हारे हम  जिए

यह तुम्हारे पाप का अंतिम चरण
रक्त की इस कीच में तुम धँस लिए

चीखने से कुछ नहीं होगा ; गले
अब हमारी उँगलियों में फँस लिए      [129 ]

19 /7 /1982